पौड़ी गढ़वाल /बिपिन नौटियाल। थापली गांव, जो कभी एक हजार से अधिक परिवारों का घर हुआ करता था, आज वीरान सा हो गया है। गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी और पलायन ने इसे खाली कर दिया। लेकिन अब इस गांव में एक नई उम्मीद की किरण जागी है। नवरात्र के पवित्र अवसर पर गांव में नवनिर्मित भैरव बाबा मंदिर ने न केवल श्रद्धा और आस्था को पुनर्जीवित किया है, बल्कि यह गांव को फिर से बसाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है। इस मंदिर के निर्माण में गांववासियों का सामूहिक सहयोग और गढ़वाली संस्कृति की झलक देखने को मिली। अब गांव के लोग अपने टूटे-फूटे घरों को पुनः बनाने और गांव में रहकर कुछ करने की योजना बना रहे हैं। मंदिर का यह निर्माण न केवल धार्मिक स्थल के रूप में कार्य कर रहा है, बल्कि यह गांव के पुनर्निर्माण के एक नए प्रयास की शुरुआत है। आइए, जानते हैं इस मंदिर के उद्घाटन के साथ क्या बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
गांव की समृद्ध विरासत, आज वीरानी की चपेट में
थापली गांव कभी अपने हजारों परिवारों की रौनक से गूंजता था, लेकिन आज यहां सिर्फ चार से पांच परिवार ही रह गए हैं। गांव में पलायन की मुख्य वजह आधुनिक जीवनशैली और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। जहां पहले खेतों में हल चलते थे और हर घर में चूल्हे जलते थे, वहीं अब खाली आंगन और बंद दरवाजों के सिवा कुछ नहीं बचा है। हालांकि, अब गांव में उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दे रही है।
नवरात्र में शुरू हुआ मंदिर निर्माण, गांववासियों ने मिलकर निभाई भूमिका
थापली गांव में नवरात्र के शुभ अवसर पर भैरव बाबा मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। मंदिर के निर्माण में गांववासियों ने अपने सामूहिक प्रयास से अहम योगदान दिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष श्रीधर प्रसाद नैथानी के नेतृत्व में इस मंदिर को बनाने में सभी ने मिलकर काम किया। समिति के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद थपलियाल और मीडिया प्रभारी अतुल थपलियाल ने भी निर्माण कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई।
गढ़वाली संस्कृति के रंग में रंगा गांव
मंदिर उद्घाटन के मौके पर गांववासियों ने पारंपरिक गढ़वाली वेशभूषा में कार्यक्रम में भाग लिया। गांव के लोगों ने लोक संगीत, नृत्य और देवी-देवताओं के गुणगान के साथ समारोह को भव्यता प्रदान की। इस दौरान भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया।
दिल्ली, देहरादून, नोएडा से लौटे लोग, गांव के भविष्य पर चर्चा
मंदिर उद्घाटन के मौके पर गांववाले देश के विभिन्न हिस्सों से लौटे। दिल्ली, देहरादून, नोएडा, श्रीनगर, पौड़ी जैसे शहरों से लौटे प्रवासियों ने एकजुट होकर गांव के पलायन और उसकी वजहों पर चर्चा की। इस बैठक में गांव को फिर से बसाने और पुराने घरों को संवारने पर विचार किया गया।
बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
थापली गांव में आज भी पानी की भारी कमी और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान कई लोग अपने गांव लौटे, लेकिन गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण वे ज्यादा दिन नहीं टिक सके। यही वजह है कि स्वरोजगार के प्रयासों के बावजूद गांव में बदलाव नहीं आया।
मंदिर बना गांव के पुनर्जीवन की आशा की किरण
भैरव बाबा का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि गांववासियों को जोड़ने और गांव को फिर से जीवंत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बन चुका है। यह मंदिर गांववासियों के बीच एकता और सामूहिक प्रयास को बढ़ावा दे रहा है। अब गांव में इस मंदिर के माध्यम से न केवल आस्था, बल्कि गांव के पुनर्निर्माण का प्रयास भी तेज हो गया है।
उम्मीद की लौ अब भी बाकी है
गिनती के कुछ परिवार अब भी थापली गांव में रहकर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि एक दिन गांव की रौनक फिर से लौटेगी। वे अपने पुराने घरों को फिर से संवारने और गांव को फिर से आबाद करने का सपना देख रहे हैं। मंदिर ने इसे संभव बनाने की दिशा में पहला कदम रखा है, और अब उम्मीद जताई जा रही है कि धीरे-धीरे गांव की गलियों में फिर से खुशहाली और जीवन की रौनक लौटेगी।