देहरादूनः उत्तराखंड में बिजली आपूर्ति की मांग में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है. साथ ही बीते सालों में ऊर्जा निगम के घाटे में भी काफी कमी आई है. इसके अलावा विद्युत वितरण प्रणाली भी काफी मजबूत हुई है. परिचालन एवं व्यवसायिक दक्षता में सुधार के लिए यूपीसीएल ने बेहद अहम कदम उठाए हैं. जिससे जनता को काफी राहत मिली है. वर्तमान में एनर्जी एकाउंटिंग बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं. जिससे आने वाले समय में उत्तराखंड के लोगों को बेहतर परिणाम मिलेंगे. यह कहना है उत्तराखंड ऊर्जा निगम का.
यूपीसीएल के अनुसार सीएम पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और निरंत प्रयासों से पिछले कुछ सालों में यूपीसीएल ने विद्युत वितरण क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है. उत्तराखण्ड राज्य में विगत सालों में विद्युत आपूर्ति की मांग में लगभग 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है, ऐसे में यूपीसीएल द्वारा एक मजबूत विद्युत वितरण प्रणाली की स्थापना के साथ-साथ परिचालन एवं व्यवसायिक दक्षता में सुधार के लिए अहम कदम उठाये गये हैं. लगातार बढ़ रही मांग की पूरी करने के लिए यूपीसीएल द्वारा विगत सालों में वितरण क्षेत्र को और अधिक मजबूत़ बनाया गया है. जिसमें नये उपसंस्थानों का निर्माण तथा नई लाईनें प्रदेशभर में स्थापित की गई हैं. साथ ही वर्ष 2023-24 में प्रदेशभर में सभी पोषकों पर विद्युत संतुलन बनाये रखने के लिए लगभग 4350 वितरण परिवर्तक स्थापित किये गये हैं. साथ ही एनर्जी एकाउन्टिंग को बेहतर बनाने हेतु 59212 वितरण परिवर्तक एवं 2602 पोषकों पर भी स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं. जिससे बिजली व्यवस्था की डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन और दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी और विद्युत घाटे को भी कम किया जायेगा.
वहीं भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं यथा आर.डी.एस.एस. स्कीम की एएमआईएसपी एंड लॉस रिडक्शन वर्तमान में सक्रिय है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्युत घाटे को कम कर उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति कराना है. जिसके लिए भारत सरकार द्वारा योजना के अन्तर्गत मानक भी निर्धारित किये गये हैं. जिनमें सभी वितरण कंपनियों को अर्हता पूर्ण करना अनिवार्य है. इनमें मुख्य मानक वित्तीय स्थायित्व जैसे इत्यादि जैसे मानक भी शामिल हैं. इसी क्रम में यूपीसीएल द्वारा प्रबन्ध निदेशक के नेतृत्व में अपनी बिलिंग एवं कलेक्शन क्षमता में सुधार करते हुए विगत 05 सालों में एग्रीकल्चर, टेक्निकल और कॉमर्शियल (AT and C) घाटे में रिकार्ड लगभग 5.8 प्रतिशत की कमी लाई गई है. जोकि सराहनीय है. बता दें कि यूपीसीएल का वर्ष 2019-20 में AT and C घाटा 20.44 प्रतिशत था. जिसको लगातार कम करते हुए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14.64 प्रतिशत पर लाया गया है. प्रबन्ध निदेशक महोदय द्वारा अवगत कराया गया है कि A T and C घाटे को कम करना डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिये महत्वपूर्ण है. घाटा कम होने से राजस्व में बढोत्तरी, तकनीकी उन्नति, मांग-आपूर्ति में संतुलन के साथ-साथ घाटे को कम होने से बचत प्राप्त होती है. जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध करायी जा सकती है. भविष्य में भी यूपीसीएल द्वारा स्मार्ट मीटरिंग की प्रणाली की स्थापना, स्काडा एवं आर.डी.एस.एस. सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग से विद्युत घाटे को कम करने में काम किया जाएगा.
यूपीसीएल के पिछले 5 सालों में घाटे में हुआ यह सुधार
साल A T and C घाटा %
1 2019.20 20.44
2 2020.21 17.79
3 2021.22 15.75
4 2022.23 15.25
5 2023.24 14.64